एक प्याली चाय गर मिल जाये तो विचारो का आगमन हो,
लिखू कुछ ऐसा जो क्रन्तिकारी हो या चाहे जो कुछ भी,
मनभावन मेरे मन का दर्पण हो।
एक प्याली चाय गर मिल जाये तो जाऊ मीलो दूर पद यात्रा पर भूके पेट भी,
एक प्याली चाय गर मिल जाये तो विचारो का आगमन हो,
लिखू कुछ ऐसा जो क्रन्तिकारी हो या चाहे जो कुछ भी,
मनभावन मेरे मन का दर्पण हो।
सुबह सुबह जब उठू मै और कोई मेरे लिए बेड टी ले आये,
तो ऐसा लगे जैसे कोई परी या अफसरा अमृत कलश मुझे थमाए,
जिसे पी कर मन तरो ताज़ा हो जाये और जीवन का रस नस नस में समाये।
और अख़बार के साथ गर चाय हो जाये,
तो हर खबर अख़बार की मेज़ पर चर्चा का विषय बन जाये,
बातें गली मोहल्ले से शुरू हो कर दुनिया की यात्रा कर आये।
शाम की चाय का भी अपना ही महत्व है,
दिन भर की भागा दौड़ी का सारांश पेश करने का ये अच्छा वक़्त है,
प्रकृति का सौंदर्य भी इस समय देखते बनता है,
जब पश्चिम में सूरज कही खो जाता है,
पक्षिया भी अपने अपने घरो की और हो जाती है,
चमकदार रौशनी अचानक ही चारो ओर फैल जाती है,
और आखिरी घूट के साथ मेरी चाय की प्याली भी खत्म हो जाती है।